पानी कम पीने से क्यों बढ़ता है वजन? कारण, नुकसान और बचाव के आसान तरीके

Why does drinking less water increase weight

पानी कम पीने से मेटाबॉलिज्म धीमा, भूख बढ़ और फैट स्टोर हो सकता है। जानें कैसे डिहाइड्रेशन वजन बढ़ाता है और दिनभर सही तरह पानी कैसे पिएं।​

पानी और वजन का असली रिश्ता

अक्सर लोग मानते हैं कि वजन सिर्फ ज्यादा खाने या कम एक्सरसाइज की वजह से बढ़ता है, जबकि पानी की कमी भी एक बड़ा छुपा कारण हो सकती है। सही मात्रा में पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म, पाचन और भूख का नियंत्रण बेहतर होता है, इसलिए हल्का सा डिहाइड्रेशन भी वजन मैनेजमेंट को बिगाड़ सकता है।​

डिहाइड्रेशन क्या होता है?

जब शरीर से पसीना, पेशाब, सांस आदि के जरिए पानी ज्यादा निकल जाए और उसकी भरपाई ठीक से न हो, तो उसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है। इस स्थिति में खून गाढ़ा होने लगता है, सेल्स को कम फ्लूइड मिलता है और कई जरूरी बॉडी फंक्शन धीमे पड़ जाते हैं, जिसका असर ऊर्जा स्तर से लेकर वजन तक पर दिख सकता है।​

पानी कम पीने से मेटाबॉलिज्म क्यों धीमा होता है?

शरीर में होने वाली ज्यादातर केमिकल प्रक्रियाएं पानी की मौजूदगी में ही सही तरह चलती हैं, जिनमें कैलोरी बर्न करके ऊर्जा बनाना भी शामिल है। जब शरीर हल्का डिहाइड्रेट होता है तो इन क्रियाओं की स्पीड घट सकती है, जिससे बेसिक मेटाबॉलिक रेट कम हो जाता है और दिनभर कम कैलोरी खर्च होती है।​
अगर रोजाना ज्यादा नहीं, पर थोड़ा‑थोड़ा कम कैलोरी बर्न हो, तो लंबे समय में वही फर्क पेट और वजन पर दिखने लगता है।​

भूख और प्यास का सिग्नल गड़बड़ाना

दिमाग को पेट, ब्लड और टिश्यू से जो सिग्नल मिलते हैं, उनमें कई बार प्यास और हल्की भूख एक जैसे महसूस हो सकते हैं। रिसर्च बताती है कि कई लोग हल्का डिहाइड्रेट होने पर पानी की बजाय सीधे कुछ खाने लगते हैं, जबकि शरीर को उस समय सिर्फ फ्लूइड की जरूरत होती है।​
जब ऐसा pattern बन जाता है, तो दिनभर extra स्नैक, मीठा पेय या फास्ट फूड लेते‑लेते कुल कैलोरी intake बढ़ जाता है और नतीजे में वजन भी बढ़ सकता है।​

थकान बढ़ने से फिजिकल एक्टिविटी कम होना

पानी कम होने पर खून की मात्रा और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है, जिससे व्यक्ति को कमजोरी, भारीपन और सुस्ती महसूस हो सकती है। इस थकान की वजह से लोग अकसर वॉक, वर्कआउट या सामान्य फिजिकल एक्टिविटी टालने लगते हैं, जिससे दिनभर की कुल कैलोरी बर्न और कम हो जाती है।​
कम एक्टिविटी, बैठे रहने की आदत और ज्यादा कैलोरी वाले खाने के साथ मिलकर धीरे‑धीरे फैट स्टोर बढ़ाती है और वजन ऊपर जाता है।​

पानी की कमी से पाचन और ब्लोटिंग पर असर

पानी पाचन रसों को पतला और functional रखने में मदद करता है, जिससे खाना सही तरह टूटकर absorb हो सके। जब पानी कम होता है तो कब्ज, भारीपन, गैस और पेट फूलने जैसी समस्या आम हो सकती है, जिससे कई लोगों को लगता है कि उनका वजन अचानक बढ़ गया है या पेट निकल आया है।​
कुछ मामलों में शरीर डिफेंस के रूप में पानी रोककर रखने लगता है (water retention), जिससे तौलने पर वजन ज्यादा और दिखने में सूजन जैसा महसूस हो सकता है।​

सही मात्रा में पानी पीने से वजन कंट्रोल कैसे होता है?

कई स्टडीज में देखा गया है कि जो लोग दिनभर पर्याप्त पानी लेते हैं, वे अक्सर कम कैलोरी खाते हैं और वेट लॉस प्लान में बेहतर रिजल्ट पाते हैं। खासकर, खाने से 20–30 मिनट पहले एक–दो गिलास पानी लेने से पेट में हल्की भराव की भावना आती है और जरूरत से ज्यादा खाने की आदत कम हो सकती है।​
सही हाइड्रेशन से मेटाबॉलिज्म थोड़ी तेज रफ्तार से काम करता है, जिससे रोजमर्रा की activities के दौरान भी अधिक कैलोरी बर्न होने की संभावना रहती है।​

दिनभर कितना पानी पीना चाहिए? (सामान्य गाइड)

हर व्यक्ति के लिए exact मात्रा अलग हो सकती है, लेकिन कई हेल्थ ऑर्गनाइजेशन वयस्कों को मौसम, एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार लगभग 2–3 लीटर पानी दिनभर में लेने की सलाह देती हैं।​
गरमी, ज्यादा पसीना, outdoor काम या वर्कआउट के दौरान प्यास लगने का इंतजार किए बिना थोड़ा‑थोड़ा पानी पीते रहना डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए फायदेमंद माना जाता है।​

हाइड्रेटेड रहने के आसान टिप्स

  • सुबह उठते ही एक–दो गिलास साधा या हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत बनाएं।​
  • मोबाइल में reminder लगाएं या हमेशा पास में बोतल रखें ताकि दिनभर घूंट‑घूंट पानी पीते रहें, सिर्फ एक बार में बहुत ज्यादा नहीं।​
  • पानी वाले फल–सब्जियां जैसे तरबूज, खीरा, संतरा, मौसमी, लौकी, टमाटर आदि रोजाना डाइट में शामिल करें।​
  • बहुत ज्यादा मीठे पेय, सोडा, energy drinks और ज्यादा कैफीन वाली चीजें कम करें, क्योंकि ये उल्टा डिहाइड्रेशन बढ़ा सकती हैं।​

किन लोगों को extra ध्यान रखना चाहिए?

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, हार्ट या किडनी की समस्या वाले मरीजों और भारी physical work करने वालों को पानी की मात्रा पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।​
ऐसी किसी भी मेडिकल condition या दवा के केस में, जिसमें फ्लूइड intake पर लिमिट होती है, डॉक्टर से पूछकर ही अपनी रोज की पानी की मात्रा तय करनी चाहिए।​

पानी कम पीना सिर्फ प्यास का मामला नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म, भूख, पाचन, एक्टिविटी लेवल और water retention जैसे कई factors को प्रभावित करके धीरे‑धीरे वजन बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।​
अगर आप वजन घटाना या कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो संतुलित डाइट और एक्सरसाइज के साथ‑साथ रोजाना सही मात्रा में पानी पीना भी आपकी हेल्थ routine का जरूरी हिस्सा होना चाहिए।​

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